प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में मनाया गया गणेश उत्सव
🌠...*_💦💦💦💦💦आज गणेश चतुर्थी के पावन पर्व के अवसर पर धूमधाम से गणेश उत्सव मनाया गया प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में कदमा संस्था के प्रमुख संजू दीदी ने संदेश में उनके शारीरिक स्वरूप के रियल अर्थ को समझाई _*...
🏵️🏵️...*_श्रीगणेश जी का बड़ा मस्तक विशाल बुद्धि का प्रतीक है। इसलिए जब हम परमपिता द्वारा दिए गए आध्यात्मिक ज्ञान का अध्ययन करते हैं और इसे अपने हर विचार, शब्द और कार्य में समझ के साथ एप्लाई करते हैं, तो हम विवेकशील हो जाते हैं_*।
🏵️🏵️...*_सूप/ छलनी जैसे चौड़े कानों का मतलब है कि, हम केवल किसी व्यक्ति वा परिस्थिति में सिर्फ अच्छाई को ही ग्रहण या आत्मसात करते हैं और शुद्ध जानकारी ग्रहण करने से हमारा मन सदा स्वच्छ रहता है_*।
🏵️🏵️...*_उनकी छोटी आंखें दूरदर्शिता का प्रतीक हैं, जिसका अर्थ है कि, कर्म करने से पहले उसके भविष्य में होने वाले परिणाम देखने के बाद ही कर्म करें_*।
🏵️🏵️...*_उनका छोटा मुख हमें यह याद दिलाता है कि, हम कम बोलें और हमारे द्वारा बोले गए हर शब्द दूसरों के लिए आशीर्वाद बने_*।
🏵️🏵️...*_उनके विशाल पेट के समान; तना (ट्रंक) इतना शक्तिशाली होता है कि, पेड़ों को उखाड़ सकता है और साथ ही उतना ही मुलायम होता है कि, एक बच्चे को उठा सकता है। इसका मतलब है कि, हमें भावनात्मक रूप से नरम और मजबूत होने की जरूरत है। हमें अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए; लव और लॉ का संतुलन बनाए रखना होगा_*।
🏵️🏵️...*_श्रीगणेश को एक ही दाँत के साथ दिखाया जाता है जोकि यह दर्शाता है कि, हमें पसंद-नापसंद, सुख-दुख, सुखद-अप्रिय, अच्छे-बुरे के द्वंद्व में नहीं फंसना चाहिए। हमें इन सभी पर काबू पाना होगा और हमेशा संतुष्टता का भाव रख संतोष सभी परिस्थितियों में शांतिपूर्ण रहना होगा_*।
🏵️🏵️...*_श्री गणेश का बड़ा पेट समाने की शक्ति को दर्शाता है, जिसका अभिप्राय है कि, हमें लोगों की कमजोरियों और उनके गलत कार्यों के बारे में दूसरों से बात नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्हें अपने अंदर समा लेना चाहिए_*।
🏵️🏵️...*_श्री गणेश के हाथों में कुल्हाड़ी, रस्सी और कमल दिखाया जाता है और उनका एक हाथ आशीर्वाद देने की मुद्रा में रहता है। जहां कुल्हाड़ी का अर्थ है कि, गलत व नकारात्मक आदतों को काटने की शक्ति, वहीं रस्सी पवित्र जीवनशैली के अनुशासन में बंधे रहने का प्रतीक है। और कमल का अर्थ है कि, कीचड़ भरे वातावरण में रहते हुए भी अछूता व शुद्ध रहना। आशीर्वाद भरा हाथ बताता है कि दूसरों का आचरण, व्यवहार कैसा भी हो, लेकिन हमारे संकल्प और बोल आशीर्वाद भरे ही हों_*।
🏵️🏵️...*_उनके बैठने की मुद्रा में, उनका एक पैर जमीन को छूता है और दूसरा पैर वे मोड़कर बैठेते हैं जिसका मतलब है कि, हमें हमेशा ज़मीन से जुड़े रहकर विनम्र बने रहना है और संसार में रहते हुए भी उससे न्यारे होकर रहना है_*।
.*_श्री गणेश जी के जन्म का सही अर्थ जाना कि, कैसे शंकर जी ने उनका सिर काटकर उनके धड़ पर हाथी का सिर लगा दिया, जो इस बात का प्रतीक है कि, परमपिता हमारे अहंकार के सिर को समाप्त कर उसके स्थान पर ज्ञान के सिर को लगाते हैं। ऐसे ही जब हम अपने हर संकल्प, बोल और कर्म में “श्री गणेश” के प्रतीक; दिव्य गुणों को अनुभव करना और स्वरूप बनना शुरू करते हैं, तो हमारी बाधाएं नष्ट हो जाती हैं और हम अपने जीवन में हर कदम पर पवित्रता, शांति और समृद्धि का आनंद लेते हैं_*।
🌹💖🌹...*_गणेश चतुर्थी के पावन पर्व की आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं! सभी खुश हों! स्वस्थ हों! समस्याओं से मुक्त हों!... संस्था के सभी सदस्य इस कार्यकर्म में बहुत उत्साहित रहे एवं सभी की समृद्धि की कामना की जिसमे प्रमुख रूप से प्रीति बहन ,पुष्पा बहन, संगीता झा, अंजना मोदी, गोपाल , शैलेंद्र भाई ,दिनेश भाई , राघवेंद्र भाई , रंजित भाई , उदय भाई ,ओम प्रकाश भाई मौजूद रहे ।
गणपति बप्पा मोरया
झारखंड आज तक
अमरजीत सिंह
रिपोर्टर