झारखंड आजतक | विशेष रिपोर्ट
जमशेदपुर की धरती आज इतिहास की गवाह बनी…
डहरे टुसू के पावन अवसर पर जमशेदपुर में आस्था, परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। सोमवार को जैसे ही डहरे टुसू पर्व की शुरुआत हुई, शहर के विभिन्न इलाकों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक सड़कों पर उमड़ पड़े। जनसैलाब को देखकर हर कोई हैरान रह गया।
सुबह से ही टुसू प्रतिमाओं के साथ पारंपरिक झांकियां, ढोल-नगाड़ों की गूंज और लोकगीतों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेकर इस लोकपर्व की रौनक को और बढ़ा दिया।
डहरे टुसू पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस अवसर पर लोगों ने सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की। आयोजन को लेकर जिला प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद दिखा। सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पर्व शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस वर्ष डहरे टुसू में रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिली है, जिसने जमशेदपुर को एक बार फिर सांस्कृतिक मानचित्र पर खास पहचान दिलाई।
डहरे टुसू ने एक बार फिर साबित कर दिया कि झारखंड की लोकपरंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत और मजबूत हैं।
झारखंड आजतक, जमशेदपुर
M.K