टाटा स्टील के कर्मचारियों के वेज रिवीजन समझौते को लेकर प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच वार्ता तेज हो गई है।

टाटा स्टील के कर्मचारियों के वेज रिवीजन समझौते को लेकर प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच वार्ता तेज हो गई है। शुक्रवार को टाटा स्टील के एचआरएम अधिकारियों के साथ यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह की एक अहम बैठक हुई। बैठक में कई दौर की चर्चा हुई, लेकिन वेतन बढ़ोतरी के मुद्दे पर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में यूनियन के नेता बैकफुट पर नजर आए। मैनेजमेंट ने एनएस ग्रेड से लेकर स्टील ग्रेड तक कर्मचारियों के वेतन में ज्यादा बढ़ोतरी करने से साफ इनकार कर दिया। कंपनी प्रबंधन ने अपने फैसले के पीछे वर्ष 2030 में संभावित खनिज संकट का हवाला दिया है। मैनेजमेंट का कहना है कि पहले टाटा स्टील के पास अपनी खदानें थीं, लेकिन 2030 के बाद कंपनी को ओपन बिडिंग प्रक्रिया में जाना होगा, जिससे खनिज की उपलब्धता में दिक्कतें आ सकती हैं। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर आर्थिक और औद्योगिक संकट की आशंका का भी जिक्र किया गया।

जमशेदपुर प्लांट में उत्पादन बढ़ाने पर जोर
बैठक के दौरान मैनेजमेंट ने जमशेदपुर प्लांट में उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। प्रबंधन का कहना है कि कलिंगानगर समेत अन्य प्लांटों में उत्पादन अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि जमशेदपुर प्लांट में उत्पादन कम है। कंपनी चाहती है कि यहां उत्पादन क्षमता को और मजबूत किया जाए।

इसके साथ ही मैनेजमेंट ने यूनियन के सामने यह प्रस्ताव भी रखा कि आने वाले दिनों में बिजली, पानी, कैंटीन, इलाज समेत कर्मचारियों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं पर दी जा रही सब्सिडी को भी वेज रिवीजन के साथ पुनरीक्षित किया जाएगा। बताया जा रहा है कि प्रबंधन के इस प्रस्ताव के बाद यूनियन असहज स्थिति में आ गई है।

बैठक के बाद यूनियन के शीर्ष तीन पदाधिकारी—अध्यक्ष, महामंत्री और डिप्टी प्रेसिडेंट—ने फिलहाल चुप्पी साध ली है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में हुआ वेज रिवीजन समझौता 31 दिसंबर 2024 तक ही लागू था। 1 जनवरी 2025 से नया वेज रिवीजन लंबित है, जिसे लेकर कर्मचारियों में असमंजस और बेचैनी बनी हुई है।

#Jharkhand Aaj Tak
    रितेश शरण 

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