महंगे होते कागज का विकल्प: साइंटिफिक एकेडमी के सतीश जी ने दिया बच्चों की प्रैक्टिस का नया मंत्र

महंगे होते कागज का विकल्प: साइंटिफिक एकेडमी के सतीश जी ने दिया बच्चों की प्रैक्टिस का नया मंत्र
​जमशेदपुर: शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती लागत, विशेषकर कागज और कॉपियों के लगातार महंगे होते दामों ने अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी समस्या को देखते हुए, जमशेदपुर स्थित साइंटिफिक एकेडमी के संस्थापक श्री सतीश जी ने एक महत्वपूर्ण पहल की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा है कि महंगे होते कागज और कॉपी का विकल्प तलाशना जरूरी है, ताकि बच्चों की दैनिक पढ़ाई और प्रैक्टिस पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
​आज शिक्षा के क्षेत्र में अपने मन की बातों को रखते हुए, श्री सतीश जी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है, लेकिन नोटबुक और स्टेशनरी की बढ़ती कीमतें, खासकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए, एक बड़ी बाधा बनती जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि:
​"प्रैक्टिस ही बच्चों की सफलता की कुंजी है। यदि कागज महंगा होने के कारण बच्चे लिखने का अभ्यास कम कर देंगे, तो उनकी शैक्षिक नींव कमजोर हो जाएगी। हमें तुरंत ऐसे सस्ते और टिकाऊ विकल्प खोजने होंगे, जो बच्चों को खूब लिखने और अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करें।"
​श्री सतीश जी ने शिक्षा जगत और सरकार से अपील की कि वे ऐसे समाधानों पर विचार करें जिनमें डिजिटल उपकरणों का उपयोग, पुन: प्रयोज्य (Reusable) लेखन पैड, या अन्य पर्यावरण-अनुकूल और सस्ते माध्यम शामिल हों। उनका मानना है कि शिक्षा संस्थानों को भी इस दिशा में कदम उठाने चाहिए ताकि कॉपियों पर होने वाले खर्च को कम किया जा सके और वह पैसा सीधे बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी सुविधाओं पर खर्च हो सके।
​यह पहल न केवल बच्चों की प्रैक्टिस को सुनिश्चित करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम होगा। साइंटिफिक एकेडमी के संस्थापक की यह मांग शिक्षा नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।
REPORT=M K

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