बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी जलापूर्ति योजना और बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना, जिनका शिलान्यास वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास जी ने किया था, आज तक अधूरी हैं। इन दोनों योजनाओं पर लगभग ₹300 करोड़ रुपये की राशि खर्च दिखाई जा चुकी है, फिर भी लगभग 4 लाख 25 हजार की आबादी को आज तक एक बूंद पानी तक नहीं मिल पाया है।
इन योजनाओं का उद्देश्य वर्ष 2018 तक प्रत्येक घर को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था, परंतु 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी फिल्टर प्लांट और पाइपलाइन अधूरे हैं।
मुख्य आरोप और तथ्य:
- सरकारी फंड का दुरुपयोग: पुराने फंड को समाप्त बताकर बार-बार नया एस्टिमेट बनाकर पुनः फंड जारी किया गया और टेंडर जारी कर सरकारी धन की लूट की गई।
- योजना अधूरी: फिल्टर प्लांट व पाइपलाइन कार्य अधूरा है, जबकि पूरा बजट व्यय दिखाया गया।
- जनता की परेशानी: 500 फीट तक बोरिंग करने के बाद भी पानी नहीं निकल रहा। हर पंचायत में 10–10 बोरिंग कर सिर्फ सरकारी फंड बर्बाद किया जा रहा है।
- न्यायालयीय आदेश की अवहेलना: झारखंड उच्च न्यायालय, रांची में दायर W.P (PIL) No. 1074/2021, 22 के आदेश के बावजूद निचली अदालत ने कार्रवाई नहीं की।
जनता की मांग:
- इस पूरी योजना की CBI या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
- संबंधित अधिकारियों से वेतन व संपत्ति से वसूली की जाए।
- बागबेड़ा जलापूर्ति योजना को शीघ्र पूर्ण कर जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
- न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
यह मामला झारखंड की जनता के मौलिक अधिकार — शुद्ध पेयजल के अधिकार — से जुड़ा है।
जनता न्याय और जवाबदेही की अपेक्षा कर रही है।