. प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय जमशेदपुर जुगसलाई बागबेड़ा शाखा की ओर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के आध्यात्मिक रहस्य के चौथा दिन के कार्यक्रम महात्म्य बताते हुए कथा वाचिक राजयोगनी ब्रह्माकुमारी कंचन दीदी जी ने बताया कि .
. इस कलियुगी दुनिया को विशेष सागर कहां जाता है, और इसी दुनिया को क्षीरसागर कहा जाता था
. इसी संसार को एक समय लक्ष्मी , नारायण के साम्राज्य कहलाता था ।
. शेषनाग के शैया पर लेटे हुए विष्णु जी को दिखाया गया जिसका प्रतीक बताते हैं कि प्रकृति उनकी दासी थी।
. सतयुग में प्रकृति के पांचों तत्व सतोपरधान होने के कारण वहां के देवी-देवताओ के पास धन बल ,तन बल,मन बल प्रचुर था। वहां विकारों का नामोनिशान नहीं था।
. श्रेष्ठ संकल्प का सृजन जीवन यात्रा को सुखदाई बनता हैं
. श्रेष्ठ संकल्प से अपने श्रेष्ठ सृष्टि का निर्माण करता है।
. हमारा ही संकल्प हमारे जीवन में सिद्ध होता हैं। चाहे व्यर्थ, चाहे समर्थ।
. मनुष्य अपने जीवन का ब्रह्मा है।
. दुनियावी बातों का चिन्तन करने से वाशना अर्थात रक्षा जागृत होता है
. नरसिंह ,नर अर्थात पुरुष चोला , और सिंह अर्थात शक्ति इसलिये शिवशक्ति कहा जाता है
इसलिए दो रात्रि बताते है कि एक शिवरात्रि और दुसरा नवरात्रि और नवरात्रि में ही माताओं को कलश दिया जाता है
उपस्थित मेहमानों द्वारा आरती संपन्न किया गया, इस मौके पर किशोर यादव पूर्व जिला पार्षद, बागबेड़ा क्षेत्र,
. नारायण सिंह शिक्षण संस्थान बागबेड़ा,
. श्री हनु जैन जी, मारवाड़ी युवा मंच के सदस्य
. श्री अमरजीत राजा जी, पूर्व युवा मोर्चा।
.श्री डीके मिश्रा जी, अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज का अध्यक्ष, बागबेड़ा, परशुराम भवन
. श्री हलदर नारायण शाह , भारतीय जनता पार्टी।
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