सोशल मीडिया का बढ़ता असर: सुविधा के साथ बढ़ते खतरेरांची |

सोशल मीडिया का बढ़ता असर: सुविधा के साथ बढ़ते खतरे
रांची | Jharkhand AajTak
आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया लोगों की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म जहाँ सूचना और संवाद को आसान बना रहे हैं, वहीं इनके दुष्परिणाम भी तेजी से सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का असंतुलित उपयोग व्यक्ति और समाज दोनों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञ बताते हैं कि सोशल मीडिया पर लाइक्स, फॉलोअर्स और तुलना की संस्कृति ने युवाओं में तनाव, अवसाद और आत्मविश्वास की कमी बढ़ा दी है। कई युवा खुद को दूसरों से पीछे मानने लगते हैं, जिससे मानसिक दबाव बढ़ता है।
सोशल मीडिया की लत एक और बड़ी समस्या बनकर उभरी है। लोग घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताते हैं, जिससे पढ़ाई, कामकाज और पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है। इससे न केवल उत्पादकता घट रही है, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
झूठी खबरें और अफवाहें फैलने में सोशल मीडिया सबसे तेज़ माध्यम बन गया है। बिना पुष्टि के वायरल होने वाली खबरें समाज में भ्रम और डर पैदा करती हैं। कई बार ऐसी अफवाहों के कारण सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ जाती है।
निजता का हनन भी एक गंभीर चिंता का विषय है। लोग अनजाने में अपनी निजी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा कर देते हैं, जिसका दुरुपयोग साइबर अपराधी कर सकते हैं। साइबर ठगी, फर्जी प्रोफाइल और ब्लैकमेलिंग जैसी घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।
इसके अलावा साइबर बुलिंग और ट्रोलिंग ने खासकर बच्चों और युवाओं को मानसिक रूप से प्रभावित किया है। अपमानजनक टिप्पणियाँ और ऑनलाइन धमकियाँ कई बार गंभीर मानसिक आघात का कारण बनती हैं।
समाजशास्त्रियों का कहना है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में दूरी भी पैदा कर रहा है। लोग वास्तविक संवाद की जगह वर्चुअल दुनिया में अधिक समय बिता रहे हैं, जिससे भावनात्मक जुड़ाव कमजोर हो रहा है।
विशेषज्ञों की राय है कि सोशल मीडिया का पूर्ण बहिष्कार समाधान नहीं है, बल्कि इसका जिम्मेदार और सीमित उपयोग ज़रूरी है। जागरूकता, डिजिटल साक्षरता और आत्म-नियंत्रण के माध्यम से ही इसके दुष्परिणामों को कम किया जा सकता है।
Jharkhand AajTak
           M.K

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