इस तस्वीर में लॉबीन हेब्रम, चंपाई सोरेन, सीता सोरेन, और मधु कोड़ा जैसे नेता बीजेपी से संबंधित नहीं हैं, फिर भी अगर बीजेपी इन्हें समर्थन दे रही है, तो इससे पार्टी की वैचारिक स्पष्टता पर सवाल उठता है।
इस तस्वीर में ज्यादातर नेता बीजेपी के नहीं हैं। फिर भी बीजेपी का दावा है कि वह सबसे बड़ी पार्टी है। अगर बीजेपी इतनी मजबूत है, तो क्यों उसे दूसरे दलों के नेताओं के साथ अपनी पहचान बनानी पड़ रही है?
क्या बाबूलाल मरांडी जैसे वरिष्ठ नेता होने के बावजूद बीजेपी मुख्यमंत्री पद के लिए एक स्पष्ट चेहरा प्रस्तुत नहीं कर पा रही है? क्या यह बीजेपी की अंदरूनी असमंजस को नहीं दिखाता? पार्टी ने सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए अपनी मूल विचारधारा से समझौता किया है। ऐसे नेता जो पहले बीजेपी के विरोधी थे, उन्हें अब अपने साथ लेकर चलना बीजेपी की विचारधारा में गिरावट को दर्शाता है।
अगर बीजेपी को सच में झारखंड में मजबूत नेतृत्व देना होता, तो वह अपने पुराने और सशक्त नेताओं पर भरोसा करती, न कि दूसरी पार्टियों के नेताओं के साथ तस्वीर खिंचवाती।
महागठबंधन के पास हेमंत सोरेन जैसे स्पष्ट और मजबूत नेतृत्व वाला चेहरा है, जबकि बीजेपी अपने मुख्यमंत्री प्रत्याशी को लेकर अनिर्णय में है।
बीजेपी जो सत्ता के लिए किसी भी प्रकार के समझौते करने को तैयार है!
देबाशीष घोष
कांग्रेस ( अध्यक्ष टेल्को कॉलोनी मण्डल ).
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