आज झारखंड उच्च न्यायालय में सौरभ विष्णु और जमशेदपुर के लगभग 50 से अधिक नागरिकों के द्वारा झारखंड सरकार द्वारा 23.12.2023 के नोटिफिकेशन के तहत जमशेदपुर को इंडस्ट्रियल टाउन बनाये जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका PIL 2636/ 2024 की सुनवाई माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद और माननीय न्यायाधीश अरुण कुमार राय की पीठ में हुई! सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने माननीय अदालत को बताया कि भारत के संविधान के तहत भारत में त्रीस्तरीय शासन विधि है - संसद, विधानसभा और स्थानीय निकाय! पंचायती राज के तहत स्वशासन भारत की सबसे प्रचीनतम व्यवस्थाओं में है! अतः इसे कोई राज्य सरकार समाप्त नहीं कर सकती है! जबकि राज्य सरकार कह रही है कि इसने जमशेदपुर में स्थानीय निकाय को समाप्त कर दिया है और सरकार और टाटा स्टील मिलकर जमशेदपुर में अच्छी नागरिक सुविधायें प्रदान करेगी! उन्होंने कहा कि पूरे जमशेदपुर शहर को जो 15725 एकड़ में फैला है, जिसमें टाटा समूह की कई कंपनियाँ और उनकी काॅलोनियों के अलावा स्थानीय निकाय जमशेदपुर नोटिफाईड एरिया कमिटि (अक्षेष) का क्षेत्र और क्षेत्राधिकार भी शामिल है, इन सबको मिलाकर जमशेदपुर इंडस्ट्रियल टाउन बनाया गया है जो संविधान का उल्लंघन होने के साथ ही नागरिकों के संवैधानिक और मानवाधिकारों का भी सीधा उल्लंघन है। इसलिए उन्होंने माननीय अदालत से इंतजा की कि झारखंड सरकार के इंडस्ट्रियल टाउन बनाने के नोटिफिकेशन को रद्द किया जाय और सरकार को जमशेदपुर के बृहद शहरी लाके में संविधान का अनुच्छेद 243Q के तहत नगर निगम बनाने का निर्देश जारी किया जाय। उन्होंने कहा कि झारखण्ड म्युनिसिपल कानून, 2011 की धारा 481 के तहत इंडस्ट्रियल टाउन को शहरी निकाय (नगर निगम) को बाहर रखे जाने का प्रावधान है न कि पूरे नगर निगम क्षेत्र को ही इंडस्ट्रियल टाउन बनाने का प्रावधान है इसलिए यह नोटिफिकेशन म्युनिसिपल कानून का भी घोर उल्लंघन है!
माननीय अदालत ने यह मानते हुए कि सरकार स्वशासन की व्यवस्था समाप्त नहीं कर सकती न ही नागरिकों के संवैधानिक और मूल अधिकारों का उल्लंघन कर सकती है सरकार के मनमाने निर्णय पर सख्त नाराजगी दिखायी और कहा इस तरह तो आप सबकुछ टाटा के दे देंगे और कर रांची, बोकारो आदि सभी स्थानीय निकाय टाटा कॅ नियंत्रण में होंगे! माननीय अदालत ने कहा कि यह नोटिफिकेशन प्रथम दृष्टया संविधान के खिलाफ एक फ्राॅड है और तत्काल प्रभाव से रद्द होने लायक है! पिटीशनर के अधिवक्ताओं ने माननीय अदालत से उक्त नोटिफिकेशन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की प्रार्थना का पर माननीय अदालत ने सरकारी वकील की प्रार्थना पर एक सप्ताह से पहले हलफनामा दायर करने का आदेश देते हुए अगली सुनवाई 13.9.24 के लिर मुकर्रर कर दी!
ज्ञातव्य है कि झारखंड सरकार ने टाटा के 100 साल से चले आ रहे काॅलोनियल राज को जिसके तहत टाटा ने आदिवासियों के 12708 एकड़ जमीन को गैरआदिवासियों को सबलीज किया है और उन जमीनों पर 100 सालों से कलक्टर की तरह अवैध रूप से भू-राजस्व वसूल कर रही है, को बनाये रखने के लिए जमशेदपुर को औधोगिक शहर बनाने का नोटिफकेशन जारी किया जिसे झारखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है! उस जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि झारखंड सरकार द्वारा किया गया 20.08.2005 का लीज समझौता एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा है। इस जमीन पर नगर निगम का अधिकार है और नगर निगम को ही भू-राजस्व वसूलने का अधिकार है जबकि टाटा भू-राजस्व वसूलती है और अबतक ₹10 लाख करोड़ (ब्याज सहित) अवैध तरीके से वसूल किया है! यही वजह है कि सरकार ने पिछले 100 सालों से जमशेदपुर में नगर निगम नहीं बनाया जबकि भारत में नगरपालिका और नगरनिगम 1688 से ही बनने शुरू हुए, रांची में 1869 में बना और स्वतंत्रता के बाद पटना में म्युनिसिपल कानून के तहत 1951 में नगर निगम बना और रांची में 1979 में जबकि जमशेदपुर में नोटिफाईड एरिया कमिटि 25.6.1924 से 8 9.1998 तक टाटा के अवैध कब्जे में रही और आज तक टाटा के आपराधिक दबाव में सरकार ने जमशेदपुर में नगर निगम नहीं बनाया और सर्वोच्च न्यायालय के 21.8.1989 के नगर निगम बनाने के निर्देश और संविधान के 74वें संशोधन की धज्जियां उड़ाती रही है।
पिटीशनर की तरफ से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, अशोक झा, रोहित सिंहा और निर्मल घोष ने प्रतिनिधित्व किया!
झारखंड आज तक
रितेश प्रसाद
रिपोर्टर